इस संसार में हम किसी को नहीं सुधार सकते, जिस दिन हम सुधर गए, यह समाज अपने आप सुधर जाएगा/
अहसास
Saturday, 28 April 2018
Sunday, 17 August 2014
आज का हाल
आज का हाल
थक गया हूँ चलते चलते, आँखों में नींद भर आई है,
बहुत देख लिया खून ख़राबा, अब सरहद भी शरमाई है,
चले नहीं दो देश क़दम साथ, यह कैसी गैल बनाई है,
ऐ सरहद के रखवालो, तुमने कौनसी घुट्टी खाई है/१/
बह गया ख़ून जाने कितना, अमृत बहाती उन नदियों में,
कैसे प्यास बुझे देश की, जहां बहता ख़ून हर गलियों में,
फूलों की ख़ुशबू कैसी है,भूल चुके उसको वादियों में,
निकले बेटे सुबह घर से, माँ आस लगाए बैठी सदियों से/२/
कलियाँ खिलती नहीं बाग़ में, यह कौनसा मौसम आया है,
देख हैरान ख़ुदा भी, इंसान तूने यह क्या रचाया है,
दोहरे मन नहीं खिलते, ईमानदारी पाठ पढ़ाया है,
तूने ख़ुद चुना यह रास्ता, ऐ नर तू व तेरा साया है/३/
कितना सुन्दर जग था वो, उठना बैठना होता साथ साथ,
आज बिछुड़ गए दूजे से, पूछते नहीं दूसरों का हाल,
दूध की नदियां तब बहती थीं, आज दिखें इसमें कंकाल,
बंदूक के दम पे डरा रहे, करें कुसंस्कारों का प्रचार/४/
Monday, 11 March 2013
माँ की याद
माँ की याद
....डा शशि कान्त सिंह (रोशन)
जीवन के हर पल में, तुझे मन से याद किया है,
तेरे नाम ही को पूजा, तेरे नाम ही को जाना है/
आई जब जब मुसीबतें, तुझे याद कर दूर भागीं,
ममता की छांव मुझको, हर पल अहसास दिलातीं/
तेरी ही दी हुई सांसें, मैं हर पल ले रहा हूँ,
तुझे याद करते करते, आंसू बहा रहा हूँ/
तुम पास नहीं हो मेरे, हर पल साथ दिखती हो,
अहसास यह तुम्हारा, ज़िंदा रखता है मुझको/
तुझे याद करूं मैं इतना, यह जान तुम पाओ ना,
तेरे नाम ही का दीपक, हर दिन मैं जलाऊँ माँ/
क्यों महसूस न किया मैंने, तुम थीं जब सामने,
अब प्यार अधिक करूं मैं, जब हो न तुम सामने/
रोया अधिक न उस पल, तुम जा रही थीं छोडके,
न जाने आज यह आंसू, रुक नहीं रहे हैं मेरे/
जब जी भर आता मेरा, ढूंड़ता हूँ उसी कोने को,
जहां दुखड़े अपने रोया था, फिर आ रहा रोना मुझको/
छिपा रखा है वो आँचल, जिसमें आंसू तब पोछे थे,
सभी गम भूलना चाहूं, पोंछ आंसू फिर उसी से/
घर के उस कौने में, आज भी तुम रहती हो,
सांसें हैं तुम्हारी जिंदा, महसूस करूँ मैं उनको/
वहाँ बैठ कर हर रोज़, कुछ पल बिता लेता हूँ,
तेरी ही याद में माँ, मैं खुदको भूल जाता हूँ//
....डा शशि कान्त सिंह (रोशन)
जीवन के हर पल में, तुझे मन से याद किया है,
तेरे नाम ही को पूजा, तेरे नाम ही को जाना है/
आई जब जब मुसीबतें, तुझे याद कर दूर भागीं,
ममता की छांव मुझको, हर पल अहसास दिलातीं/
तेरी ही दी हुई सांसें, मैं हर पल ले रहा हूँ,
तुझे याद करते करते, आंसू बहा रहा हूँ/
तुम पास नहीं हो मेरे, हर पल साथ दिखती हो,
अहसास यह तुम्हारा, ज़िंदा रखता है मुझको/
तुझे याद करूं मैं इतना, यह जान तुम पाओ ना,
तेरे नाम ही का दीपक, हर दिन मैं जलाऊँ माँ/
क्यों महसूस न किया मैंने, तुम थीं जब सामने,
अब प्यार अधिक करूं मैं, जब हो न तुम सामने/
रोया अधिक न उस पल, तुम जा रही थीं छोडके,
न जाने आज यह आंसू, रुक नहीं रहे हैं मेरे/
जब जी भर आता मेरा, ढूंड़ता हूँ उसी कोने को,
जहां दुखड़े अपने रोया था, फिर आ रहा रोना मुझको/
छिपा रखा है वो आँचल, जिसमें आंसू तब पोछे थे,
सभी गम भूलना चाहूं, पोंछ आंसू फिर उसी से/
घर के उस कौने में, आज भी तुम रहती हो,
सांसें हैं तुम्हारी जिंदा, महसूस करूँ मैं उनको/
वहाँ बैठ कर हर रोज़, कुछ पल बिता लेता हूँ,
तेरी ही याद में माँ, मैं खुदको भूल जाता हूँ//
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