आज का हाल
थक गया हूँ चलते चलते, आँखों में नींद भर आई है,
बहुत देख लिया खून ख़राबा, अब सरहद भी शरमाई है,
चले नहीं दो देश क़दम साथ, यह कैसी गैल बनाई है,
ऐ सरहद के रखवालो, तुमने कौनसी घुट्टी खाई है/१/
बह गया ख़ून जाने कितना, अमृत बहाती उन नदियों में,
कैसे प्यास बुझे देश की, जहां बहता ख़ून हर गलियों में,
फूलों की ख़ुशबू कैसी है,भूल चुके उसको वादियों में,
निकले बेटे सुबह घर से, माँ आस लगाए बैठी सदियों से/२/
कलियाँ खिलती नहीं बाग़ में, यह कौनसा मौसम आया है,
देख हैरान ख़ुदा भी, इंसान तूने यह क्या रचाया है,
दोहरे मन नहीं खिलते, ईमानदारी पाठ पढ़ाया है,
तूने ख़ुद चुना यह रास्ता, ऐ नर तू व तेरा साया है/३/
कितना सुन्दर जग था वो, उठना बैठना होता साथ साथ,
आज बिछुड़ गए दूजे से, पूछते नहीं दूसरों का हाल,
दूध की नदियां तब बहती थीं, आज दिखें इसमें कंकाल,
बंदूक के दम पे डरा रहे, करें कुसंस्कारों का प्रचार/४/